Story Of Hama- Grand Son Of Iblish

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       शैतान का पोता हामा जन्नत में क्यों जाएगा?


शैतान का पोता हामा जन्नत में क्यों जाएगा? शैतान की बीवी का नाम ऐसा खतरनाक क्यों?

 बिस्मिल्लाहहिर्रहमानिर्रहीम। अस्सलाम वालेकुम। प्यारे दोस्तों, शैतान सिर्फ एक मखलूक नहीं बल्कि इंसान का असली दुश्मन है। ऐसा दुश्मन जो ना थकता है, ना सोता है, ना बाज आता है। बल्कि शैतान हमारा वो दुश्मन है जिसने बाकायदा कसम खा रखी है। कि वह हमें सीधे रास्ते से हटाकर ही दम लेगा। लेकिन क्या आप जानते हैं इब्लीस तन्हा नहीं उसका पूरा खानदान है। उसकी नस्ल है और वह रोज नई-नई शैतानी नस्लें पैदा करता है। हर एक को एक नया काम सौंपता है। कोई भाई को भाई से देता है। कोई दिलों में हसद बोगज़ और कीना भर देता है। कोई मुआशरे में जनाओ बेहयाई को आम करता है तो कोई कत्लो गारद का बाजार गर्म करवा देता है। यह वह लश्कर है जो इंसान को जहन्नुम की तरफ धकेलने के लिए हरदम मुतहरिक है। लेकिन इसी लश्कर में इसी नस्ल में एक ऐसा भी था जो सबसे अलग निकला। वो अपनी ही शैतानी सफों से अलग हुआ ना सिर्फ बगावत की बल्कि ऐसी राहों पर चल निकला जो रोशनी हिदायत और नबूवत से भरी हुई थी। यह वह जिन है जिसका नाम हामा था। एक ऐसा किरदार जिसकी कहानी आपको भी हैरान करेगी और चौंका भी देगी। लिहाजा आज की


    इस Blog में आप जानेंगे शैतान इब्लीस की नस्ल कहां-कहां पाई जाती है। शैतान की बीवी कौन है? और वो कौन सा लम्हा था जब शैतान का पोता हामा मुख्तलिफ अंबिया से मुलाकात करता हुआ आखरी नबी हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम की खिदमत में आ पहुंचा। इस मुलाकात में क्या हुआ? उसने क्या कहा? और हामा अब कहां है? इन सब सवालों के जवाब आपको इसी वीडियो में मिलेंगे। बस वीडियो को आखिर तक लाजमी देखिएगा क्योंकि जो कुछ आज आप सुनने जा रहे हैं वह हर मुसलमान के दिल को झंझोड़ने के लिए काफी है।

 

इब्लीस का बीबी का नाम और उसके कारनामे ।

    प्यारे दोस्तों उलमा और मुफसरीन के मुताबिक इब्लीस तन्हा नहीं बल्कि उसकी नस्ल को बढ़ाने के लिए उसके साथ एक खबीस बीवी भी पैदा की गई थी। रवायत के मुताबिक इब्लीस की बीवी का नाम सहाम था। एक ऐसा नाम जो सुनने में ही सन्नाटा तारी कर देता है। इसका मतलब है जख्म देने वाली, तीरों की बारिश करने वाली और महज यह इत्तेफाक नहीं यह नाम उसके किरदार का मुकम्मल आईनादार है। यही वह वजूद है जो इब्लीस के साथ मिलकर गुमराही की फैक्ट्री चला रही है। इसकी नस्ल जो उसकी कोख से फूटी सिर्फ और सिर्फ एक मकसद के लिए वजूद में आई। इंसान को हिदायत से दूर करके बोगज़, हसद, जिना, झूठ, चुगलखोरी, फसाद, कत्लो गारत और फितनो फवाहिश की आग में झोंक देना। यह औरत सिर्फ एक जिननी नहीं बल्कि गुमराही की जड़ है। एक ऐसी मां जिसकी औलाद ने जमानों को उजाड़ा, मुआशरों को तोड़ा, दिलों को जलाया और कौमों को खून में नहलाया। और आज भी हर वसवसा, हर फितना, हर लड़ाई के पीछे इसी नस्ल के शयादीन सरगरम हैं। 

इब्लीस का पोता Hama कैसे Imaan लाए और Adam अलैहिस्सलाम से लेकर आख़िरी नेवी रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तक का सफर 

   प्यारे दोस्तों, इसी गुमराह नस्ल में एक ऐसा वजूद भी था जो इन सबसे मुख्तलिफ निकला। अपने आबाओ अजदाद की राह छोड़कर👉 हामा👈 रोशनी की तलाश में निकला। और यह तलाश उसे एक दिन दरबार तक ले आई। जहां से हिदायत का सूरज तलू होता है। और अब हामा जिन का वो हैरानक वाक्य आपको सुनाते हैं जो खुद सहाबा इकराम ने अपनी आंखों से देखा और रिवायत किया। हदीस की मौतबर किताबों में हजरत अंस बिन मालिक रेदीअल्लाहु ताला अनहु फरमाते हैं कि एक दिन हम रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के हमरा मक्का मुकर्रमा के जंगलात की तरफ निकले। 

     हम तहामा पहाड़ों में एक मुकाम पर बैठे थे कि अचानक एक अजीब सा बूढ़ा शख्स सामने आया। उसके हाथ में एक लंबी लाठी थी। वो आहिस्ता आहिस्ता उसके सहारे चलता हुआ करीब आ रहा था। जब वो करीब आया तो उसने निहायत मौदबाना अंदाज में आप सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम को सलाम किया। हजूर सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने जवाब दिया और फिर सहाबा इकराम से मुखातिब होकर फरमाया यह बूढ़ा अपनी चाल और आवाज से जिन मालूम होता है।

    फिर आप सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम ने उससे पूछा तू कौन है? उसने जवाब दिया या रसूल्लाह सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम मैं जिन हूं। मेरा नाम हामा बिन हीम बिन लाकीस बिन इब्लीस है। यह सुनकर आप सल्लल्लाहहु अलैह वसल्लम ने फरमाया मैं तेरे और इब्लीस के दरमियान सिर्फ दो पुश्तों का फासला देख रहा हूं। तू वाकई बहुत कदीम है। फिर आप सल्लल्लाहो अलैह वसल्लम ने उससे वह सवाल किया जो हर सुनने वाले को चौंका देता है।

    दोस्तों हजूर सल्लल्लाहहु अलैह वसल्लम ने उस जिन से उसकी उम्र दरियाफ्त फरमाई तो वो जिन कुछ लम्हों के लिए खामोश हुआ। फिर आहिस्तगी से गोया हुआ। या रसूल्लाह सल्लल्लाहहु अलैह वसल्लम जितनी उम्र इस दुनिया की है उतनी ही मेरी भी है या शायद कुछ कम। जब काबिल ने हाबिल को कत्ल किया था। उस वक्त मैं नोखेज जिन था। पहाड़ों में दौड़ा करता और लोगों के दिलों में वसवसे डाला करता था। यह सुनकर आप सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया यह तो बहुत बुरा अमल था। इस पर वो जिन गुलगीर लहजे में अर्ज गुजार हुआ। या रसूल्लाह सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम मुझे मलामत ना फरमाइए। मैं उन लोगों में से हूं जो हजरत नूह अलैहिस्सलाम पर ईमान लाए और सच्चे दिल से तौबा की। मैं उन नेक लोगों के साथ दीन की दावत में शामिल रहा और उनके मिशन में मददगार बना।

    यह कहते हुए वो जिन इतना रोया कि सहाबा इकराम भी अपने आंसू ना रोक सके। फिर उसने रोते हुए कहा, अल्लाह की कसम मैं बहुत शर्मिंदा हूं और अल्लाह की पनाह मांगता हूं इस बात से कि मैं कुफ्र पर बाकी ना रहूं। मैंने हजरत हूद अलैहिस्सलाम से मुलाकात की और उन पर ईमान लाया। हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम से भी मिला और जब उन्हें आग में डाला जा रहा था तो मैं उनके साथ था। हजरत यूसुफ अलैहिस्सलाम को जब कुएं में डाला गया तो मैं उनसे पहले ही उस कुएं में पहुंच चुका था। फिर हजरत शोएब अलैहिस्सलाम और हजरत मूसा अलैहिस्सलाम से भी मेरी मुलाकात हुई। 

    हजरत मूसा अलैहिस्सलाम ने मुझे तरात सिखाई और जातेजाते फरमाया अगर तुम हजरत ईसा अलैहिस्सलाम से मिलो तो मेरा सलाम पहुंचा देना। वो जिन कुछ लम्हे रुका। फिर आहिस्ता से कहा जब मेरी मुलाकात हजरत ईसा अलैहिस्सलाम से हुई तो मैंने हजरत मूसा अलैहिस्सलाम का सलाम उन तक पहुंचाया। तब हजरत ईसा अलैहिस्सलाम ने भी मुझसे फरमाया अगर तुम्हारी मुलाकात मोहम्मद सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम से हो तो मेरी तरफ से उनको भी सलाम कहना। फिर वह जिन हामा रोते हुए आप सल्लल्लाहो अलैह वसल्लम के कदमों में झुक गया और कहा या रसूल्लाह सल्लल्लाहो अलैह वसल्लम मैं इसी अमानत को पूरा करने आया हूं और और हजरत ईसा अलैहिस्सलाम का सलाम आपकी खिदमत में पेश करता हूं और आप सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम पर ईमान लाता हूं।

       प्यारे दोस्तों जब उस जिन हामा ने हजरत ईसा अलैहिस्सलाम का सलाम आप सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम तक पहुंचाया तो महबूब दो आलम सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम की आंखों से आंसू जारी हो गए और आप सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम ने इंतहाई रिक्कत अमेज अंदाज में फरमाया ईसा अलह सलाम पर सलाम हो और ऐ हामा अमानत पहुंचाने की वजह से तुझ पर भी सलाम हो अब बता तेरी क्या हाजत है हामा ने अदबो नियाज के साथ अर्ज किया या रसूल्लाह सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम हजरत मूसा अलैहिस्सलाम ने मुझे तरात सिखाई थी। हजरत ईसा अलैहिस्सलाम ने इंजील सिखाई थी। अब मैं चाहता हूं कि आप मुझे कुरान सिखा दें। प्यारे दोस्तों यह दरख्वास्त सुनते ही आप सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम ने उस जिन पर खुसूसी शफकत फरमाई और उसे कुरान की तालीम देना शुरू की। आप सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम ने उसे सिखाई। आप सल्लल्लाहो अलैह वसल्लम ने उसे कुरान मजीद की चंद सूरतें सिखाई। रवायत में आता है कि बाज मवाके पर आप सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम ने उसे सिर्फ 10 सूरतें सिखाई। आखिर में हुजूर सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम ने मोहब्बत भरे लहजे में फरमाया ऐ हामा जब कभी तुम्हें कोई हाजत हो तो मेरे पास आ जाना और हमसे मुलाकात तर्क ना करना। 

    अब हामा कहा है?

    प्यारे दोस्तों, नेवी ए करीम रोउफूर रहीम  हजूर सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम इस दुनिया से पर्दा फरमा गए। लेकिन इस वाक्य के बाद 👉हामा 👈के बारे में फिर कभी कोई मजीद बात रवायत नहीं हुई। ना यह मालूम हो सका कि वो जिन जो सदियों पुराना था जो अंबिया इकराम की सोहबत पा चुका था। जिसने कुरान मजीद की तालीम नबी आखरू जमा सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम से हासिल की थी। आज वह कहां है? क्या वह अब भी जिंदा है या वह भी वक्त के तूफान में कहीं खो गया है? यह सब कुछ तो सिर्फ अल्लाह ताला जानता है।

  हर इंसान के साथ एक शैतान मुकर्रर है

 प्यारे दोस्तों, अब यहां एक निहायत अहम हकीकत जान लीजिए। हजरत अब्दुल्ला बिन मसूद रदी अल्लाहहु ताला अनहो से रिवायत है कि आप सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया तुम में से कोई भी ऐसा नहीं जिसके साथ एक शैतान मुकर्रर ना किया गया हो। जो हमेशा उसके करीब रहता है। सहाबा ने अर्ज किया या रसूल्लाह सल्लल्लाहहु अलैह वसल्लम क्या आपके साथ भी है? आप सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया हां मेरे साथ भी लेकिन अल्लाह ताला ने मुझे उस पर गालिब कर दिया है। इसलिए वह मुझे सिर्फ नेकी की ही बात बताता है।

शैतान शैतान का वजूद हमारी आजमाइश के लिए है ।

   दोस्तों शैतान का वजूद हमारी आजमाइश के लिए है और अल्लाह ताला ने हर इंसान के साथ उसको मुकर्रर किया ताकि यह दुनिया इम्तहानगाह बनी रहे। मगर अल्लाह की तरफ रुजू, सच्चे दिल की तौबा और नबी सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम की सुन्नत की पैरवी हमें शैतान के शर से बचा सकती है। याद रखें अल्लाह हकीम मतलिक है। याद रखें अल्लाह हकीम है और उसका कोई भी काम बेमकसद नहीं होता। जब हम कायनात की किसी भी मखलूक को देखते हैं तो दिल से यही सदा निकलती है। ऐ हमारे रब तूने यह सब कुछ बेमकसद नहीं बनाया। तू पाक है। हमें दोजख के अज़ाब से बचा ले।

   हिकमत ए अल्लाह पाक

  दोस्तों अल्लाह की बनाई हर मखलूक के पीछे एक हिकमत है। इमाम गजाली रहमतुल्लाह आलेह ने कीमियाए सहादत में एक निहायत दिलचस्प वाक्या लिखा है। हजरत मूसा अलैहिस्सलाम  एक बार छत पर थे। उन्होंने एक छिपकली को देखा। उन्होंने अल्लाह पाक से अर्ज किया या अल्लाह पाक तूने इस हकीर सी छिपकली को क्यों पैदा फरमाया? अल्लाह ताला ने फरमाया मूसा तुमसे पहले यह छिपकली भी मुझसे यही सवाल कर रही थी कि तूने मूसा को क्यों पैदा किया? ए मेरे कलीम मैंने जो कुछ भी पैदा किया है वह सब मेरी हिकमत के तहत है। बिला वजह कुछ नहीं बनाया। इसी हिकमत के उसूल पर जिन्नात और शैतान की तखलीक भी एक आजमाइश और निजाम का हिस्सा है। 

 इब्लीस के नस्ल कैसे पैदा होती है और उनका नाजायज हरकते

    प्यारे दोस्तों  रवायत में है कि जब अल्लाह ताला ने इब्लीस की नस्ल बढ़ाना चाही तो शैतान पर गुस्से का अलका किया। इसी गुस्से से एक चिंगारी पैदा हुई और इस चिंगारी से इब्लीस की बीवी पैदा की गई। यानी शैतान की नस्ल भी आग से है और गुस्से से जन्म लेने वाली है।  

     फिर अल्लाह ताला ने फरमाया ऐ इब्लीस मैं जितनी औलाद आदम पैदा करूंगा उतनी ही औलाद तुझे भी पैदा करूंगा। यही वजह है कि हदीस मुबारका में आया है हर इंसान के साथ एक जिन भी पैदा होता है जो उसे बुराई पर उकसाता रहता है। और दोस्तों जिन्नात के बारे में यह बात भी जान लीजिए कि वह इंसानों की तरह मुजक्कर बोनस होते हैं। 

   वो आपस में शादी बिहा करते हैं। उनकी नस्ल भी चलती है और उनकी औलाद भी पैदा होती है। बाज जिन्नात ऐसे होते हैं जो इंसानों की शक्ल शुभहात रखते हैं। यानी उनकी दुनिया, उनके रिश्ते, उनका समाज कई मामलात में इंसानों से मुशाबहत रखता है। 

   प्यारे दोस्तों, आपने अक्सर सुना होगा कि शैतान के चेले जगह-जगह पाए जाते हैं। मगर क्या आप जानते हैं कि उनकी पैदाइश का निजाम क्या है? हयातुल हैवान जैसी मौतबर रवायत पर मुश्तमिल किताब में शैतान की नस्ल के बारे में एक हैरतंगेज वाक्या मशकूर है। रवायत के मुताबिक शैतान हर रोज 10 अंडे देता हैअल्लाह ताला ने इब्लीस के जिस्म में अजीब निजाम रखा है। उसकी दाएं रान में नर की शर्मगाह और बाएं रान में मादा की शर्मगाह है। जहां से रोजाना 10 अंडे निकलते हैं। और इन अंडों से नए शयातीन और शैतानियां पैदा होती हैं। यह सिर्फ आम शयातीन नहीं बल्कि हर एक मखसूस काम पर मामूर होता है। आइए इनमें से कुछ के नाम और काम देखते हैं। तरतबा इब्लीस की बीवी लाकेस और लहान वजू और नमाज के वक्त वसवसे डालने पर मुकरर हैं। 

    जब आप नमाज के ख्यालात में खो जाएं। समझ लीजिए यही कारंदे फल हैं। हफाफ यह सेहरा में शैतानी फितना फैलाता है। बसर मुसीबत जदा इंसानों को गलत रद्दे अमल पर उकसाता है। नोहा चीखो पुकार चेहरे नोचना कपड़े फाड़ना अज अंबिया अलैहिस्सलाम के दिलों में वसवसे डालने पर मामूर था।

     मगर अंबिया इकराम को अल्लाह ताला ने इन शयातीन से महफूज़ रखा। आूर जिना पर मामूर है और रवायत में आता है कि वह जिना( बगैर सादी के या सादी के बाद Sex) के वक्त मर्द औरत की शर्मगाहों पर सवार होता है। वासिम यह शैतान घरों में बगैर सलाम और जिक्र इलाही के दखल होने वालों का मुंतजिर रहता है। फिर वह घर में झगड़े, नफरत और फितना बरपा करता है। मतूस यह शैतान झूठी खबरें, अफवाहें और वहम और वसवसे फैलाता है। और यही वजह है कि मुद्दसीन फरमाते हैं भूत परीद चुड़ैल जिन्नात कीड़े मकोड़े यह सब शैतान के अंडों से पैदा होने वाली मखलूकात में से हैं। सोचिए अल्लाह ताला ने किस जबरदस्त हिकमत के साथ इंसान के मुकाबले में शैतान का लश्कर बनाया। साथ ही हिदायत, कुरान, अंबिया, ईमान और फरिश्ते भी अता फरमाए ताकि इंसान इस जंग में तन्हा ना हो।

       प्यारे दोस्तों जैसा कि आपने पढ़ा शैतान सिर्फ एक अकेला दुश्मन नहीं बल्कि उसकी नस्ल, उसके चेले, उसके कारिंदे दुनिया के हर कोने में फैले हुए हैं। रवायत में आता है कि एक मौके पर शैतान ने 30 अंडे दिए। 10 मशरिक में, 10 मगरिब में और 10 जमीन के वस्त में इन अंडों से पैदा होने वाली मखलूकात यानी भूत, परीद, कीड़े मकोड़े, चुड़ैलें और मुख्तलिफ किस्म के शयातीन आज भी दुनिया के हर ख्ते में फितना और फसाद फैलाने पर लगे हुए हैं। मगर यहां एक बहुत अहम बात ज़हन में रखनी चाहिए। मोहम्मद बिन काब रहमतुल्लाह आलेह से रिवायत है जिन और शयातीन असल के ऐतबार से एक ही मखलूक हैं। लेकिन जो ईमान लाए वह जिन कहलाए और जो कुफ्र और शरारत पर कायम रहे वही शैतान के नाम से याद किया जाता है। 

School College ke Students कैसे अपने जाल फसाता है ।

      नाजरीन अगर आज हम अपनी सोसाइटी पर नजर डालें तो हमें साफ दिखाई देता है कि शैतान ने जदीद हथियारों से लेस होकर खासतौर पर नौजवानों को निशाने पर लिया हुआ है। वो स्कूलों, कॉलेजों, यूनिवर्सिटीियों में नौजवानों के दिलों में वसवसे डालता है। सिर्फ देखने में क्या हमदर्द है? हमदर्दी कोई जुर्म नहीं। बातचीत मना थोड़ी है। यह जदीद(Technology) दौर है। थोड़ा तो मॉडर्न बनो। यह सब छोटे-छोटे वसवसे होते हैं। आहिस्ता आहिस्ता एक जाल बुनते हैं। फिर मुलाकातें, बातचीत, एसएमएस, फिर दिखावा, फैशन, फ्री स्टेटस और नौबत इस मुकाम तक पहुंचती है कि या तो इंसान जिना( बगैर सादी के या सादी के बाद Sex) के करीब पहुंच जाता है या फिर अपने वालदैन की नाराजगी, तालीम से गफलत और करियर की तबाही की राह इ्तियार करता है। चाहे अंजाम निकाह हो या कुछ और। शैतान को अपनी कामयाबी मिल जाती है क्योंकि वह इंसान को अल्लाह पाक की रजा, हया, पाकीजगी और सच्चाई से महरूम कर देता है। यही शैतान का असल हदफ है। इंसान के दिल को आलूदा करना, नियत को धुंधला देना और अल्लाह ताला की बंदगी को ख्वाहिशात की गुलामी में बदल देना।

      शैतान का जोर सिर्फ उन पर है जो उसे अपना सरपरस्त बनाते हैं। शैतान सिर्फ वसवसा डालता है। जबरदस्ती नहीं करता। फैसला हमारा अपना होता है। और रोजे कयामत शैतान कहेगा मुझे मलामत ना करो। खुद को मलामत करो। तो बचने का रास्ता क्या है? हर काम से पहले खुद पूछें। क्या यह अमल कुरान सुन्नत के मुताबिक है? जो अमल शक में डाले उसे तर्क कर दें। सालेह मोहब्बत इख्तियार करें। कुरान का फहम हासिल करें। अपने नफ्स को पहचाने और काबू पाएं। 

     और सबसे बढ़कर अल्लाह ताला से मुसलसल दुआ करें कि वह हमें शैतान के जाल से महफूज़ रखे। याद रखें यह जंग आसान नहीं। लेकिन अगर इब्तदा में ही हथियार डाल दिए तो समझ लीजिए हमने अपनी जिंदगी शैतान के सुपुर्द कर दी। दोस्तों शैतान का सबसे बड़ा हुनर यह है कि वह अपने होने का एहसास तक नहीं होने देता। वह चुपके से आता है। आहिस्ता से वसवसा डालता है और दिल में एक जुमला छोड़ देता है। बस आज के लिए छोड़ दो। कल से सही कर लेना। यही उसकी चाल है। वह जल्दी नहीं करता। वह सिर्फ बीज बोता है और फिर इंसान की गफलत पानी बनकर इस बीज को सेंचती रहती है। नबी सल्लल्लाहहु अलैह वसल्लम ने फरमाया शैतान इंसान की रगों में खून की तरह दौड़ता है। यानी वह हमारे अंदर इतनी खामोशी से दाखिल हो जाता है कि हमें महसूस तक नहीं होता। एक और मौके पर आप सल्लल्लाहहु अलैह वसल्लम ने फरमाया शैतान इंसान के दिल के करीब बैठा रहता है। जब अल्लाह ताला का जिक्र किया जाए तो वह दूर भाग जाता है और जब अल्लाह ताला का जिक्र ना हो तो वह दिल पर कब्जा कर लेता है। यही वजह है कि बाज औकात जानते बूझते हुए भी गलती करते हैं। दिल कहता है यह ठीक नहीं लेकिन फिर हम वसवसों का शिकार हो जाते हैं। शैतान का एक हरबा यह भी है कि वह गुनाह को मामूली बना देता है। 👉👿 वह कहता है बस एक दफा ही तो है👈। 

   हर कोई तो कर रहा है। तुम फरिश्ता तो नहीं। फिर जब गुनाह हो जाता है तो वह इंसान को शर्मिंदगीगी से इस कदर दबाव में ले आता है कि इंसान नेकी से भी दूर हो जाता है। कहता है अब क्या फायदा? अब तो तुम बहुत गिर चुके हो। यानी पहले बरगलाता है फिर शर्मिंदा करके अल्लाह से दूर करता है। 

     लेकिन दोस्तों अल्लाह ताला के रसूल सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम ने हमें उम्मीद दी है। आप सल्लल्लाहहु अलैह वसल्लम ने फरमाया जो शख्स सच्चे दिल से तौबा करे अल्लाह ताला उसके तमाम गुनाहों को बखश देता है। चाहे वह समंदर की झाग के बराबर क्यों ना हो। और आप सल्लल्लाहो अलैह वसल्लम ने यह भी फरमाया अगर तुम गुनाह ना करो तो अल्लाह ताला ऐसी मखलूक पैदा करता है जो गुनाह करे और फिर तौबा करे ताकि अल्लाह उन पर रहम करें। यह है रब की रहमत। याद रखिए शैतान सिर्फ उन पर हमला करता है जिनमें खैर(यानी Allah पाक से माफी मांगने) के आसार होते हैं। जो पहले ही गुमराह हो चुके हो उनकी तरफ वह पलट कर भी नहीं देखता। इसलिए अगर आपको लगता है कि शैतान आपसे मुसलसल उलझ रहा है तो इस बात की इलामत है कि आप अल्लाह की राह पर चलना चाहते हैं। दोस्तों शैतान सिर्फ जिना चोरी और कत्ल जैसे बड़े गुनाहों की तरफ नहीं बुलाता। उसका कमाल यह है कि वह आपको छोटे-छोटे कामों से शुरू करवाता है। नमाज को कुछ देर से पढ़ो। फिर कजा करो फिर छोड़ दोवालदैन की बात पर हल्की सी नाराजगी। फिर चीख कर बात करना फिर नाफरमानी। रिज़्क में थोड़ी सी मिलावट फिर पूरा धोखा देखते ही देखते इंसान के दिल का रंग बदल जाता है और वह समझता है कि वह ठीक है। नबी सल्लल्लाहहु अलैह वसल्लम ने फरमाया जिसके दिल में रत्ती बराबर भी तक होगा वह जन्नत में दाखिल नहीं होगा और तकब्बर भी शैतान की एक खामोश साजिश है। इंसान को खुद पसंद बना देता है। 

     और हां शैतान का एक और बड़ा हथियार है हसद। आप सल्लल्लाहहु अलैह वसल्लम ने फरमाया हसद नेकियों को इस तरह खा जाता है जैसे आग लकड़ी को जला देती है। शैतान चाहता है कि भाई भाई से दोस्त दोस्त से जलने लगे। रिश्ते टूट जाएं ।

    अच्छे लोगों की सोबत इख्तियार करें। रात को सोने से पहले दिन भर के आमाल पर नजर डालें कि कहां शैतान कामयाब हुआ और अगली सुबह नए अज्म के साथ उठे। याद रखें शैतान का सबसे बड़ा वार तब होता है जब हम हथियार डाल देते हैं।

     इसलिए अगर आप किसी गुनाह में मुब्तला हैं, किसी गलत आदत का शिकार हो चुके हैं तो अभी इसी लम्हे अल्लाह से एक सादी सी तो इसी लम्हे अल्लाह से एक सादा सी दिल से निकली दुआ मांगे। या अल्लाह मुझे मेरी कमजोरियों से निकाल दे। मुझे अपने करीब कर ले। और मुझे शैतान के हर वार से महफूज़ फरमा दे। क्या पता आपकी यही दुआ अल्लाह को इतनी पसंद आए कि वह आपकी जिंदगी बदल दे। 

     दोस्तों, यह दुनिया आरजी जगह है। यहां का हर लम्हा आजमाइश है। शैतान हर मोड़ पर छुपा बैठा है। लेकिन अगर हमने अल्लाह को अपना बना लिया, तो शैतान खुद हमारे सामने बेबस हो जाएगा। दोस्तों, अगर आपको यह वीडियो पसंद आई है, और इसने आपके दिल को हिलाया है, तो इसे लाइक कीजिए और बाकी दोस्तों के साथ भी इसको शेयर कीजिए। अगली वीडियो तक के लिए इजाजत दीजिए।

         🌹🌹🌹🌹अल्लाह हाफिज🌹🌹🌹🌹


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