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झूठे खुदा बाल की हकीकत
तस्सवुर कीजिए। हजारों साल पहले एक कौम थी। एक ऐसी कौम जिसने अल्लाह को जाना उसके नबी को सुना। उसकी किताब को समझा। और फिर उसने सब कुछ छोड़ दिया। उन्होंने एक पत्थर के आगे सजदा किया। उन्होंने एक बुत के लिए अपने बच्चे कुर्बान किए। उन्होंने एक झूठे खुदा को पुकारा जिसने कभी किसी की नहीं सुनी। उस झूठे खुदा का नाम था बाल और अल्लाह रब्बुल इज्जत ने खुद अपनी किताब में उस नाम का जिक्र किया। सिर्फ नाम नहीं लिया बल्कि उसकी हकीकत बयान की। उसकी तबाही का वाकया सुनाया और उस कौम का इबरतनाक अंजाम दुनिया के सामने रख दिया।
आज हम इसी हकीकत को इस ब्लॉग पोस्ट में आप लोगों तक पहचाने की कोशिश करेंगे । यह सिर्फ तारीख नहीं यह कुरानी सच है।
अजीज दोस्तों कुरान करीम में अल्लाह ताला ने बहुत सी कौमों का जिक्र फरमाया। कुछ कौमों को उनकी इबरत के लिए याद किया गया। कुछ को उनकी तबाही के लिए। और कुछ को इसलिए कि आने वाली नस्लें सबक सीखें। इन्हीं में से एक जिक्र है बाल का। सूर साफात में अल्लाह ताला फरमाता है अतना बाला वजनास खालिकन क्या तुम बाल को पुकारते हो और अुल खालिकन यानी बेहतरीन खालिक को छोड़ देते हो सूर साफात आयत 125 यह एक नबी की जुबान से निकला हुआ सवाल था वह नबी थे हजरत इलियास अलैहिस्सलाम और यह सवाल उन्होंने अपनी कौम से किया। वो कौम जो अल्लाह ताला को छोड़कर एक झूठे बुत की इबादत में डूब गई थी। बाल कौन था? कहां से आया? क्यों लोग उसके आगे झुके? और अल्लाह ताला ने उस झूठे खुदा का क्या अंजाम किया? आज हम उन तमाम सवालों का जवाब ढूंढेंगे कुरान से। तफसीर से, तारीख से और मुस्तनद इस्लामी मसादिर से।
बाल को समझने के लिए थोड़ा पिछे जाना होगा
दोस्तों बाल को समझने के लिए हमें थोड़ा पीछे जाना होगा। बहुत पीछे। हजारों साल पहले की दुनिया में जब इंसानियत का एक बड़ा हिस्सा शिर्क की अंधेरियों में डूबा हुआ था। जब लोग सूरज को पूजते थे, चांद को पुकारते थे और पत्थर को अपना रब मानते थे। बाल यह लफ्ज असल में सामी जबान का लफ्ज है। इसका मतलब है मालिक, सैयद या आका।
अलग-अलग कौमों में इसका इस्तेमाल अलग-अलग बुतपरस्ती के लिए होता था। लेकिन कुरान जिस बाल का जिक्र करता है वो खासतौर पर कदीम शुमाली अरब कनान और फिनीशिया के इलाकों में पूजा जाने वाला एक बड़ा बुत था। कुछ तारीख और तफसीर के मसादिर के मुताबिक बाल को बारिश का खुदा समझा जाता था। जरखेज़ और फसलों का मालिक माना जाता था। और तूफान और बिजली का निगबान कहा जाता था।
यानी लोग सोचते थे कि अगर बाल खुश हुआ तो बारिश आएगी, फसल आगेगी और जिंदगी चलेगी। और अगर बाल नाराज हुआ तो कहत आएगा, तूफान आएगा और तबाही आएगी। सोचिए यह कितनी बड़ी गुमराही थी। वो रब जिसने जमीन बनाई, आसमान बनाया, पानी उतारा और फसल उगाई। इसको भूलकर एक पत्थर के बुत के आगे हाथ फैलाना। लेकिन यही होता है जब इंसान इल्म से दूर हो जाता है। जब इंसान नबी की आवाज नहीं सुनता। जब इंसान हवा और ख्वाहिश को अपना रब बना लेता है। और यही कौम बनी इसराइल के एक हिस्से के साथ।
अल्लाहहु अकबर कुरान और तफसीर इब्न कसीर के मुताबिक हजरत इलियास अलैहिस्सलाम को अल्लाह ताला ने एक ऐसी कौम की तरफ भेजा जिन्होंने बाल की इबादत शुरू कर दी थी। यह कौम बनी इसराइल की एक शाख थी। वो कौम जो हजरत मूसा अलैहिस्सलाम की शरीयत पर चलती थी। वो कौम जिसे अल्लाह ताला ने बार-बार नेमतें दी थी। लेकिन वक्त के साथ-साथ उनके दिल सख्त हो गए।
उनकी आंखों पर पर्दा पड़ गया और वो अल्लाह ताला को छोड़कर बाल की तरफ मुड़ गए। तफसीर इबने कसीर में है कि यह लोग बाल के इतने बड़े पुजारी बन गए थे कि उनके दरमियान 70 हजार से ज्यादा लोग उस बुत की इबादत करते थे। 70 हजार एक पूरी कौम गुमराही की अंधेरियों में और फिर अल्लाह ने उनकी तरफ हजरत इलियास अल सलाम को भेजा।
हजरत इलियास अलैहिस्सलाम का कुरान में जिक्र
दोस्तों हजरत इलियास अलैहिस्सलाम उनका नाम कुरान में दो जगह आया है। सूरह-ल अनहाम आयत 85 और सूरह असफात आयात 123 से 132 तक अल्लाह ताला फरमाता है व् इलियास मिनल मुरसलीन और बेशक इलियास रसूलों में से थे सूर असाफात आयत 123 वो एक सच्चे नबी थे अल्लाह ताला ने उन्हें एक मुश्किल मिशन पर भेजा। एक ऐसी कौम की तरफ जो अपनी गुमराही में मस्त थी जो अपने झूठे खुदा बाल से मोहब्बत करती थी। जो सोचती थी कि वो सीधे रास्ते पर हैं।
और हजरत इलियास अलैहिस्सलाम ने उन्हें पुकारा। अल्लाह ताला कुरान में उनकी जुबान से यह अल्फाज़ बयान करता है। अतनस खलन अल्लाह रब्बक व रब्बा आबा अवलीन क्या तुम बाल को पुकारते हो? और बेहतरीन खालिक को छोड़ देते हो? अल्लाह पाक जो तुम्हारा रब है और तुम्हारे पहले बाप दादों का भी रब है। सूर असफात आयात 125 और 126 यह कितना गहरा सवाल था। यह कितनी सीधी बात थी।
एक नबी अपनी कौम को कह रहा था आंखें खोलो। यह पत्थर तुम्हारा कुछ नहीं कर सकता। वो जिसने तुम्हें पैदा किया वो अल्लाह पाक है। वो जो तुम्हें रिज़्क देता है वो अल्लाह पाक है। सिर्फ उसी की तरफ लौटो। लेकिन कौम ने नहीं सुना। कौम ने हजरत इलियास अलैहिस्सलाम को झूठलाया। कौम ने उनका मजाक उड़ाया। और उन्होंने कहा हम अपने बाप दादों का दीन नहीं छोड़ सकते। यह वही जवाब था जो हर गुमराह कौम ने दिया।
Narfani और अल्लाह ताला का अजाब
प्यारे दोस्तों जब गुमराही अपनी उरूज़ तक पहच जाती है तब लोग सच और हक ये दोनों को नजर अंदाज कर देते है ।
हजरत इलियास अलैहिस्सलाम को झूठलाया उनकी नाफरमान कौम ने । और उन्होंने कहा हम अपने बाप दादों का दीन नहीं छोड़ सकते। यह वही जवाब था जो हर गुमराह कौम ने दिया।
कौमे नूह ने भी यही कहा। कौमे इब्राहिम ने भी यही कहा। कौमे मूसा ने भी यही कहा। इंसान जब ख्वाहिश का गुलाम बन जाता है तो वह हर हक की आवाज को रोक देता है। तफसीर तबरी और तफसीर इबने कसीर के हवाले से इस कौम में बाल के पुजारी एक बड़ा तबका थे। यह पुजारी कौम के अंदर अपनी हुकूमत कायम कर चुके थे।
वो लोग जो बाल की इबादत छोड़ते उन्हें कौम का दुश्मन करार दिया जाता और जो लोग हजरत इलियास अलैहिस्सलाम की बात सुनने लगते उन्हें डराया जाता उन्हें धमकियां दी जाती यानी हक बोलना मुश्किल था और सच्ची बात सुनना इससे भी ज्यादा मुश्किल और हजरत इलियास अलैहिस्सलाम अकेले एक पूरी कौम के सामने खड़े थे लेकिन एक नबी अल्लाह पाक का एक बंदा कभी अकेला नहीं होता। जब एक कौम हक सुनने से इंकार कर देती है। जब वो अल्लाह पाक के नबी को झुठलाती है।
झूठा खुदा कुछ दे ना सका
जब वो अपनी गुमराही में और ज्यादा घुस जाती है। तब अल्लाह पाक का कानून अपना काम करता है। अल्लाह पाक कुरान में फरमाता है फकबू फदर इल्ला इबाद्लाह मुखसीन तो उन्होंने उसे झुठलाया और बेशक वो अज़ाब में हाजिर किए जाएंगे सिवाय अल्लाह पाक के मुखलिस बंदों के। सूर असफात आयात 127 और 128 यह अल्लाह का फैसला था। यह एक इलाही हुक्म था और फिर अज़ाब आया। इस्लामी तारीख मसादिर और तफसीर इबने कसीर के मुताबिक उस कौम पर शदीद कैद नाजिल हुआ। बारिश रुक गई। जमीन सूख गई। फसलें खत्म हो गई और खाना खत्म होने लगा। वो बाल जिसे यह लोग बारिश का खुदा कहते थे। वो बाल जिसके आगे यह लोग हजारों साल से सजदा करते आए थे। वो बाल एक बूंद पानी भी नहीं दे सका।
👌 सोचने वाली बात👌
सोचिए कितना बड़ा सबक है यह। इंसान अपना दिल, अपनी मोहब्बत अपना सजदा एक ऐसी चीज को देता है जो उसके किसी काम नहीं आती और जब मुसीबत आती है तब वो झूठा खुदा गायब हो जाता है और इंसान हाथ मलता रह जाता है फिर कौम में आहिस्ता-आहिस्ता बेकरारी पैदा होने लगी तारीखत तबरी में है कि जब कैद ने उस कौम को तोड़ कर रख दिया तब कुछ लोगों के दिल में तौबा की रोशनी आई।
कुछ ने सोचा शायद हम गलत थे। कुछ को हजरत इलियास अल सलाम की बात याद आने लगी। लेकिन बाज लोग फिर भी अपनी खुद पर कायम रहे। क्योंकि गुमराही जब एक बार दिल में घर कर ले तो वह आसानी से नहीं निकलती। फिर अल्लाह ताला फरमाता है वकना अल आखरीन सलाम अला यासीन इन कजासनी इनमिनीन और हमने उसकी तारीफ बाद में आने वालों में भी बाकी रखी सलाम हो इलियास पर हम मोहसिनों को ऐसा ही बदला देते हैं बेशक वह हमारे मोमिन बंदों में से थे। सूर असाफात आयात 139 से 132 तक यह अल्लाह का अपने नबी के साथ मामला था। दुनिया ने उन्हें झुठलाया।
Baal एक सोच थी
दुनिया ने उन्हें तन्हा किया। लेकिन अल्लाह ताला ने उनका नाम कयामत तक के लिए जिंदा कर दिया। बाल वो झूठा खुदा। आज कौन उसका नाम इज्जत से लेता है? कोई नहीं। लेकिन हजरत इलियास अलैहिस्सलाम कुरान में आज भी उन पर सलाम भेजा जाता है। तारीख गवाह है।
जिस कौम ने बाल को पूजा वो कौम मिटा दी गई। तफसीर इब्न कसीर में हाफिज इब्न कसीर रहमतुल्लाह अल लिखते हैं कि बाल का यह बुत एक अजीम लेकिन बाततिल बुत था और जो लोग उसकी इबादत करते रहे उनका अंजाम दुनिया में भी बुरा हुआ और आखिरत में भी यह वही कानून है जो अल्लाह ताला ने कुरान में बार-बार दोहराया विक्लाह फकल्लाह दलालन बदा और जो अल्लाह ताला के साथ शिर्क करे वह बहुत दूर की गुमराही में पड़ गया। सूर निसा आयत 116 बाल सिर्फ एक नाम नहीं था। बाल एक सोच थी। वो सोच के कोई और भी अल्लाह ताला का काम कर सकता है। वो सोच के कोई और भी देने वाला हो सकता है। वो सोच कि कोई और भी मुश्किलात दूर कर सकता है।
और दोस्तों यह सोच सिर्फ उस कौम में नहीं थी। यह सोच आज भी मौजूद है। आज भी लोग पत्थर से दुआ मांगते हैं। आज भी लोग तावीज और गंडे को अपना हामी मानते हैं। बाल का नाम बदल जाता है। बाल की सोच नहीं बदलती। लेकिन यहां एक चीज और जो बहुत जरूरी है। कुराने करीम ने बाल का जिक्र सिर्फ तबाही के लिए नहीं किया। कुराने करीम ने बाल का जिक्र इंसान को जगाने के लिए किया। ताकि हम देखें कि गुमराही का अंजाम क्या होता है। ताकि हम समझें कि झूठे खुदाओं की हकीकत क्या है ताकि हम अल्लाह ताला की तरफ लौटें और सिर्फ उसी के आगे झुके।
असली खुदा कौन है आपकी नजर में ?
जिसने जमीन आसमान पर्बत पानी आग हवा जिन इंसान बनाई वो असली खुदा है । या फिर अल्लाह पाक की बनाई हुई चीजों से अपने खुदके लिए अपने ही हाथों से खुदा को बना कर उसके सामने झुकना वो असलीबखुद है ।
दोस्तों, यह वह लम्हा है जिसके बारे में सोचना ही रूह को हिला देता है। एक तरफ बाल वह झूठा खुदा हजारों लोगों का पूजा हुआ। लाखों की इबादत का मरकज। दुनिया की बड़ी-बड़ी मुलाकातों में जिसका खौफ था। आज कहां है बाल? कहां है इसके पुजारी? कहां है इसकी शान? खाक में, मिट्टी में। नामोनिशान तक नहीं।
और दूसरी तरफ अल्लाह रब्बुल इज्जत जिसका नाम आज भी हर सुबह करोड़ों जबानों पर अल्लाहू अकबर के साथ गूंजता है। जिसकी किताब कुरान आज भी एक लफ्ज भी नहीं बदला। जिसके नबी सल्लल्लाहो अलैह वसल्लम की सुन्नत आज भी दुनिया के हर कोने में लाखों लोग फॉलो करते हैं। अल्लाह फरमाता है हु अवल व आखिर व जाहिर व बातिन व कुल श अलीम वो पहला है और आखरी है जाहिर है और छुपा हुआ भी और वह हर चीज का जानने वाला है। सूर अल हुदीद आयत तीन बाल एक वक्त का झूठा खुदा खत्म हो गया। अल्लाह पाक अजली और अबदी है। हमेशा से था हमेशा रहेगा। यही हक है। ला इलाहा इल्ल्लाह अगर आपको इस्लामी तारीख के अहम और मुस्तनद वाक्यात जानना पसंद है तो हमारे Hindi Jnk Blog जरूर सब्सक्राइब करें। अल्लाह हमें हक को समझने और उस पर अमल करने की तौफीक अता फरमाए ।
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